बहादुरगढ़: महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी परिसर में सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में डाबौदा कलां के रहने वाले प्लंबर सुनील की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पत्नी ने स्थानीय सदर थाने में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि सुनील की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी ड्यूटी का समय भी खत्म हो चुका था, फिर भी उन्हें जबरन जहरीली गैस से भरे सीवर टैंक में उतारा गया, जिससे उनकी जान चली गई।


अस्पताल प्रबंधन सहित 8 जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा दर्ज

इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर महाराजा अग्रसेन अस्पताल प्रबंधन के आला पदाधिकारियों और सुपरवाइजर सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मालूम हो कि सोमवार को यूनिवर्सिटी परिसर में सीवर की सफाई के दौरान अचानक जहरीली गैस का रिसाव होने से पांच कर्मचारी अचेत हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार को प्लंबर सुनील ने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप: बिना सुरक्षा उपकरणों के जबरन कराया जानलेवा काम

मृतक सुनील की पत्नी मीनू ने पुलिस को बताया कि उनके पति अस्पताल में बतौर प्लंबर सेवाएं दे रहे थे। 18 मई को सुबह 9 बजे उनकी शिफ्ट खत्म हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन पर दबाव बनाकर उन्हें सीवरेज टैंक की सफाई के काम में धकेल दिया गया। गंभीर आरोप यह भी है कि इस बेहद खतरनाक और जानलेवा काम के लिए कर्मचारियों को कोई भी सुरक्षा किट या उपकरण मुहैया नहीं कराए गए थे। जहरीली गैस की चपेट में आने से सुनील के साथ तीन अन्य सफाईकर्मियों की हालत भी बेहद नाजुक हो गई थी।

सूचना छिपाने और लापरवाही बरतने के आरोप से घिरा प्रशासन

पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई। परिजनों को न तो सुनील के स्वास्थ्य की सही स्थिति बताई गई और न ही इलाज के बारे में स्पष्ट किया गया। जब परिवार के लोग खुद अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें सुनील की मौत का पता चला। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने इस पूरी घटना पर चुप्पी साध रखी है और वे अब दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

इन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम FIR में शामिल

सदर थाना पुलिस ने मीनू की शिकायत के आधार पर मीना सुभाष गुप्ता, कुनाल बंसल, प्रेम गर्ग, अशोक कुमार गर्ग, संजय गुप्ता, प्रधान राजेश गुप्ता, एचओडी राजीव भारद्वाज और इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर अंशुल के खिलाफ कानूनी धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।