पुलिस हिरासत में मौत पर बड़ा फैसला, अदालत ने कहा- सबूत पर्याप्त
बठिंडा (पंजाब)। करीब डेढ़ साल पहले सीआईए-1 में पुलिस हिरासत के दौरान हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में अहम मोड़ आ गया है। स्थानीय अदालत ने पंजाब पुलिस के पांच कर्मियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश देते हुए केस को सेशन कोर्ट में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। आरोपितों में तत्कालीन सीआईए-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर नवप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल राजविंदर सिंह और कांस्टेबल गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह व जसविंदर सिंह शामिल हैं। सभी घटना के समय सीआईए-1 यूनिट में तैनात थे। मामला जिले के गांव लक्खी जंगल निवासी भिंदर सिंह की मौत से जुड़ा है। न्यायिक जांच में सामने आया कि भिंदर सिंह को कथित तौर पर गैरकानूनी हिरासत में रखकर यातनाएं दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार उसे वॉटरबोर्डिंग तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाया जाता है। जांच में यह भी पाया गया कि मौत के बाद इसे हादसा दर्शाने के लिए झील में डूबने की कहानी गढ़ी गई। न्यायिक जांच ने डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के दावे को खारिज कर दिया। मृतक के भाई सतनाम सिंह ने 19 अक्तूबर 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर अवैध हिरासत और यातना के आरोप लगाए थे। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी संकेत मिला कि मृतक और इंस्पेक्टर एक ही समय में एक ही इलाके में मौजूद थे। पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी को भी जांच में संदिग्ध माना गया। पुलिस का दावा था कि भिंदर सिंह ने थर्मल प्लांट के पास झील में छलांग लगाई थी, लेकिन अदालत ने इस थ्योरी को स्वीकार नहीं किया। परिवार पहले ही इसे हिरासत में मौत बताते हुए विरोध जता चुका है।
