दिल्ली हादसा: 9 शव एक साथ जले, श्मशान घाट पर भावुक दृश्य
दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरी राजधानी को स्तब्ध और शोककुल कर दिया है। रविवार को जब निगमबोध घाट पर एक ही परिवार के कई सदस्यों के पार्थिव शरीर पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों के अचानक खत्म हो जाने की एक हृदयविदारक दास्तां थी।
निगमबोध घाट पर भावुक कर देने वाला दृश्य
घाट पर अरविंद जैन और नितिन जैन के परिवारों के सदस्यों की अंतिम विदाई के दौरान माहौल अत्यंत गमगीन था। सबसे मार्मिक क्षण वह था जब डेढ़ साल के मासूम बच्चे के शव को उसकी माँ के साथ एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई। इस करुण दृश्य ने वहां मौजूद रिश्तेदारों, पड़ोसियों और अन्य लोगों को फूट-फूटकर रोने पर मजबूर कर दिया। भाजपा, कांग्रेस और 'आप' के तमाम नेताओं ने भी पहुंचकर शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।
घटनाक्रम: मिनट-दर-मिनट (टाइमलाइन)
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तड़के 3:35 बजे: दूसरी मंजिल पर एसी ब्लास्ट के साथ आग भड़की।
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तड़के 3:55 बजे: दमकल की पहली तीन गाड़ियां मौके पर पहुँचीं।
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सुबह 4:25 बजे: फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू हुआ।
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सुबह 6:25 बजे: कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
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सुबह 8:05 से 8:20 बजे: अलग-अलग मंजिलों और सीढ़ियों से एक के बाद एक शव बरामद हुए।
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शाम 4:30 बजे: पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए।
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शाम 5:30 बजे: अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई।
हताहतों का विवरण
इस दुर्घटना में कुल 9 लोगों की जान गई है:
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तीसरी मंजिल (एक ही फ्लैट): शिखा जैन (45), अरविंद जैन (62), अनीता जैन (60), निशांक जैन (35), आंचल जैन (33) और मासूम आकाश (1.5 साल)।
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चौथी मंजिल: नितिन जैन (50), शैली जैन (48) और समायकन जैन (25)।
घायलों की स्थिति: नवीन जैन की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, रक्षिता (22) और प्रियल (15) ने दूसरी मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई। अर्चित जैन को दमकल कर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाला।
धुआं बना मौत का मुख्य कारण: विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे अग्निकांडों में मौत की सबसे बड़ी वजह कार्बन मोनोऑक्साइड होती है।
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दम घुटना: सांस के जरिए जब यह जहरीली गैस शरीर में जाती है, तो खून में ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। इससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है और बचाव की स्थिति में नहीं रहता।
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फेफड़ों पर असर: धुएं के कारण सांस की नली में सूजन आ जाती है और वह सिकुड़ जाती है, जिससे दम घुटने (स्मोक इनहेलेशन इंजरी) से मृत्यु हो जाती है।
दिल्ली के बड़े अग्निकांडों का इतिहास
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मार्च 2026: पालम में आग से एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत।
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मई 2024: विवेक विहार अस्पताल अग्निकांड में 7 नवजात शिशुओं की मौत।
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फरवरी 2024: अलीपुर की फैक्ट्री में 11 लोगों की जान गई।
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दिसंबर 2019: अनाज मंडी की फैक्ट्री में आग से 43 लोगों की मौत।
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जून 1997: उपहार सिनेमा कांड, दिल्ली का सबसे बड़ा अग्निकांड (59 मौतें)।
